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कॉर्बेट में लौटा रोमांच – बिजरानी जोन खुलते ही उमड़ी सैलानियों की भीड़, जंगल सफारी के साथ पर्यटन सीजन का हुआ आगाज़

कॉर्बेट में लौटा रोमांच – बिजरानी जोन खुलते ही उमड़ी सैलानियों की भीड़, जंगल सफारी के साथ पर्यटन सीजन का हुआ आगाज़

रामनगर:
विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में बुधवार सुबह से एक बार फिर रोमांच और रौनक लौट आई। मानसून सत्र के बाद बिजरानी पर्यटन जोन को आज औपचारिक रूप से पर्यटकों के लिए खोल दिया गया। सुबह 6 बजे जैसे ही जोन का गेट खुला, देश-विदेश से पहुंचे सैलानी जिप्सियों में सवार होकर जंगल सफारी के लिए रवाना हो गए।

बिजरानी जोन को पारंपरिक तरीके से खोला गया, जहां कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक राहुल मिश्रा, एसडीओ अमित ग्वासाकोटी, रेंज अधिकारी नवीन पांडे और क्षेत्रीय विधायक दीवान सिंह बिष्ट मौजूद रहे। सभी ने रिबन काटकर और पर्यटकों से भरी जिप्सियों को हरी झंडी दिखाकर नए पर्यटन सीजन का शुभारंभ किया।

हर साल की तरह इस बार भी बिजरानी जोन को मानसून के बाद 15 अक्टूबर से पर्यटकों के लिए खोला गया है। बारिश के दौरान यह जोन सुरक्षा कारणों से 30 जून तक बंद रहता है। अब मौसम साफ होते ही कॉर्बेट और आसपास के पर्यटन स्थलों में पर्यटकों की आमद बढ़ने लगी है।

जानकारी के अनुसार, पहले ही दिन सुबह और शाम की दोनों पालियों के सभी 60 सफारी स्लॉट पूरी तरह बुक रहे।
सुबह से ही दिल्ली, देहरादून, जयपुर, लखनऊ और गुजरात जैसे शहरों से आए पर्यटकों में जबरदस्त उत्साह देखा गया। सैलानियों ने कहा कि बारिश के बाद जंगल की हरियाली और साफ मौसम में सफारी का अनुभव बेहद रोमांचक है। कई पर्यटकों ने उम्मीद जताई कि उन्हें बाघ के दर्शन भी होंगे।

बिजरानी जोन कॉर्बेट के सबसे लोकप्रिय क्षेत्रों में से एक है, जो अपने घने साल के जंगलों, खुले मैदानों और वन्यजीवों की विविधता के लिए प्रसिद्ध है। यहां अक्सर बाघ, हाथी, हिरण, मोर और सैकड़ों पक्षी प्रजातियां देखी जा सकती हैं।

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक राहुल मिश्रा ने बताया कि पार्क प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
उन्होंने कहा, “पर्यटकों की सुविधा और सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। सफारी मार्गों की मरम्मत, जिप्सियों की फिटनेस जांच और गाइड्स को प्रशिक्षण दिया गया है। सभी जिप्सी चालकों को नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि हर सैलानी को सुरक्षित और आनंददायक अनुभव मिल सके।”

उन्होंने यह भी बताया कि कॉर्बेट के सबसे प्रसिद्ध ढिकाला जोन को 15 नवंबर से खोला जाएगा। उसी दिन से पार्क के अन्य जोनों में नाइट स्टे की सुविधा भी शुरू हो जाएगी, जिसका पर्यटक पूरे साल इंतजार करते हैं। फिलहाल पर्यटक ढेला, झिरना, गर्जिया और बिजरानी जोन में जंगल सफारी का आनंद उठा सकते हैं।

पर्यटन सीजन शुरू होने से स्थानीय कारोबारियों के चेहरे पर भी मुस्कान लौट आई है। होटलों, रिजॉर्ट्स, ट्रैवल एजेंसियों और जिप्सी चालकों को अब बेहतर कारोबार की उम्मीद है। मानसून के कारण बंद पड़े रास्तों के खुलने से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में भी तेजी आने की संभावना है।

स्थानीय गाइड्स और जिप्सी संचालकों के मुताबिक, बिजरानी जोन के खुलते ही बुकिंग तेज हो गई हैं और आने वाले दिनों में दीपावली व सर्दियों के सीजन में बड़ी संख्या में सैलानी यहां पहुंचेंगे।

भारत का सबसे पुराना राष्ट्रीय उद्यान कॉर्बेट पार्क 1936 में हैली नेशनल पार्क के रूप में स्थापित हुआ था। बाद में इसका नाम प्रसिद्ध शिकारी और संरक्षणवादी जिम कॉर्बेट के नाम पर रखा गया। आज यह सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में बाघ संरक्षण के प्रतीक के रूप में जाना जाता है।

बिजरानी जोन के खुलने के साथ ही एक बार फिर कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में सैलानियों का रोमांच लौट आया है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले हफ्तों में जैसे-जैसे मौसम खुशनुमा होगा, वैसे-वैसे जंगलों में पर्यटकों की चहल-पहल भी और बढ़ेगी — और इसके साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई रफ्तार मिलेगी।

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