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उत्तराखण्ड

ऋषिकेश में देर रात ‘मुठभेड़’ के बाद दो बदमाश गिरफ्तार

ऋषिकेश। उत्तराखंड में हाल के महीनों में पुलिस और बदमाशों के बीच कथित मुठभेड़ों की संख्या लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। ताजा मामला ऋषिकेश क्षेत्र का है, जहां पुलिस ने देर रात दो बदमाशों के साथ मुठभेड़ होने का दावा करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार दोनों आरोपियों के पैरों में गोली लगी है और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया है।
पुलिस के मुताबिक चेकिंग के दौरान एक मोटरसाइकिल पर सवार दो संदिग्ध युवक मुंह पर कपड़ा बांधे हुए दिखाई दिए। पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन वे बैरियर को टक्कर मारकर श्यामपुर की ओर भाग निकले। इसके बाद पुलिस टीम ने उनका पीछा किया।
पुलिस का दावा है कि पीछा किए जाने पर दोनों बदमाशों ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। जवाब में पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाई, जिसमें दोनों आरोपियों के पैरों में गोली लग गई। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से दो तमंचे, जिंदा कारतूस और वारदात में प्रयुक्त मोटरसाइकिल बरामद होने की बात कही गई है। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपी कुछ दिन पहले ऋषिकेश में हुई फायरिंग की घटना में वांछित थे, जिसमें दो लोग घायल हुए थे।
घटना की सूचना मिलने पर वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और अस्पताल में भी आरोपियों की स्थिति का जायजा लिया।

बढ़ती मुठभेड़ों पर उठ रहे हैं सवाल

हालांकि पुलिस ने पूरी कार्रवाई को आत्मरक्षा में की गई जवाबी कार्रवाई बताया है, लेकिन लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। पिछले कुछ समय से उत्तराखंड में भी उत्तर प्रदेश की तर्ज पर मुठभेड़ों की संख्या बढ़ती दिखाई दे रही है। लगभग हर घटना में एक जैसी कहानी सामने आती है—बदमाश भागते हैं, पुलिस पीछा करती है, फायरिंग होती है और अंत में गोली आरोपियों के पैरों में लगती है।
ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या यह महज संयोग है या फिर अपराध नियंत्रण की एक नई रणनीति? इसका जवाब निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही सामने आ सकता है।
फिलहाल इस मामले में पुलिस का पक्ष सामने आया है। घटना के दूसरे पक्ष, स्वतंत्र जांच या न्यायिक पुष्टि का इंतजार किया जाना चाहिए ताकि सच्चाई पूरी तरह स्पष्ट हो सके।
लोकतंत्र में पुलिस के दावों पर आंख बंद करके विश्वास करना भी उचित नहीं और बिना सबूत उन्हें खारिज कर देना भी नहीं। इसलिए इस कथित मुठभेड़ की सच्चाई आखिर क्या है, यह निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

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