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उत्तराखण्ड

नाबालिग उम्र, गुंडई का गुरूर और सोशल मीडिया पर हिंसा का प्रदर्शन

रामनगर/पीरूमदारा।
पीरूमदारा क्षेत्र में नाबालिग लड़कियों से जुड़ा एक चिंताजनक मामला सामने आया है। एक लड़की ने आरोप लगाया है कि कुछ नाबालिग लड़कियां उसके घर में जबरन घुस आईं, उसके साथ गाली-गलौज की, मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी। पीड़िता का यह भी आरोप है कि मारपीट का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया।
मामले में पीड़ित पक्ष का कहना है कि शुरुआत में दो लड़कियां घर में घुसीं और हमला किया। बाद में रामनगर से तीन अन्य लड़कियों को भी बुलाए जाने की बात सामने आई है। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि हमलावर पक्ष के पास तमंचा होने की जानकारी उसे मिली। हालांकि, इस संबंध में पुलिस की ओर से आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
बताया जा रहा है कि पीड़िता और आरोपित लड़कियां पहले से एक-दूसरे को जानती थीं। सभी लड़कियां नाबालिग बताई जा रही हैं, जिससे मामला और गंभीर हो जाता है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल मारपीट का मामला नहीं बल्कि नाबालिगों में बढ़ती आपराधिक प्रवृत्ति का भी संकेत माना जाएगा।
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि कुछ असामाजिक तत्व नाबालिग लड़कियों को अपने प्रभाव में लेकर उन्हें दबंगई और हिंसा की राह पर धकेल रहे हैं। हालांकि, इस पहलू की पुष्टि जांच के बाद ही संभव होगी। लेकिन यह जरूर है कि सोशल मीडिया पर हिंसा का वीडियो डालना, दहशत बनाना और समूह बनाकर हमला करना समाज के लिए गंभीर चेतावनी है।
चिंता सिर्फ एक घटना की नहीं, बदलती सोच की है
यह मामला इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि जिस उम्र में बच्चों को पढ़ाई, करियर और अपने भविष्य पर ध्यान देना चाहिए, उसी उम्र में कुछ किशोर-किशोरियां दबंगई, गैंगबाजी और सोशल मीडिया पर हिंसा दिखाने जैसी मानसिकता की ओर बढ़ते दिख रहे हैं। यह प्रवृत्ति परिवार, समाज और कानून—तीनों के लिए चुनौती है।

पीरूमदारा पुलिस के सामने मामला पहुंच चुका है। अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि घटना का पूरा सच क्या है और किन-किन धाराओं में कार्रवाई की जाएगी। लेकिन इतना तय है कि यह मामला सिर्फ एक झगड़े का नहीं, बल्कि नाबालिगों के बीच बढ़ती हिंसक प्रवृत्ति और सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

बच्चों के हाथ में मोबाइल, गलत संगत और दिखावे की संस्कृति अगर मिल जाए, तो परिणाम खतरनाक हो सकते हैं। बेटियों को ताकतवर बनाना जरूरी है, लेकिन ताकत और गुंडई में फर्क समझाना उससे भी ज्यादा जरूरी है।
हुनर, शिक्षा और आत्मसम्मान से पहचान बनती है—मारपीट, धमकी और वायरल वीडियो से नहीं।

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