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“ऋषिकेश बना ‘मिनी कसीनो’, होटल में जुआ-शराब की महफिल… और फिर पड़ गई पुलिस की एंट्री!”
देहरादून/ऋषिकेश, 28 मार्च 2026
ऋषिकेश, जिसे आध्यात्मिक नगरी कहा जाता है… वहां हरिद्वार रोड का एक होटल इन दिनों “लास वेगास” बनने की कोशिश में था। अंदर ताश की गड्डियां फड़फड़ा रही थीं, कैसिनो क्वाइन खनक रही थीं और शराब के जाम छलक रहे थे। लेकिन ये रंगीन रात ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी… क्योंकि अचानक “सिस्टम” जाग गया।
एसएसपी देहरादून के निर्देश पर पुलिस ने होटल नवरंग में चल रही इस हाई-प्रोफाइल जुआ पार्टी पर ऐसी दबिश दी कि 40 लोग मौके पर ही धर लिए गए। मौके से 3356 कैसिनो क्वाइन, 26 ताश की गड्डियां, 1.37 लाख रुपये नकद और शराब की बोतलें बरामद हुईं।
होटल में ‘कसीनो नाइट’, बाहर कानून की नींद!
सबसे बड़ा सवाल यही है—इतनी बड़ी जुआ पार्टी आखिर चल कैसे रही थी? क्या स्थानीय पुलिस को भनक नहीं थी… या फिर सब “नजरअंदाज” किया जा रहा था?
कार्रवाई के बाद आईडीपीएल चौकी का पूरा स्टाफ सस्पेंड कर दिया गया। यानी मामला सिर्फ जुआ खेलने वालों का नहीं, बल्कि “सिस्टम की सेटिंग” का भी दिख रहा है।
गिरफ्तार आरोपी—ऋषिकेश से दिल्ली तक का ‘जुआ नेटवर्क’
इस जुआ पार्टी में सिर्फ स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि दिल्ली, मेरठ, नोएडा और टिहरी तक के लोग शामिल थे। कुछ प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:
अशोक थापा, सूरज, हर्षवर्धन उर्फ पिंटू रावत, विनोद सिंह, नरेन्द्र पाल, सन्तन सिंह, हितेश, राकेश जोशी, सोनू, मोहन सिंह, भगवान सिंह, गोपाल सिंह, सुरेन्द्र सिंह, सलीम, बक्सी सिंह पंवार, संजीव (दिल्ली), राहुल सिंह बिष्ट, अभिषेक (मेरठ), प्रमोद बिष्ट, राजेश सिंह, गुरुप्रसाद, राहुल (मेरठ), त्रिलोक सिंह राणा, महेन्द्र सिंह, शिव सिंह, भगवती प्रसाद, लखदीप कुमार (दिल्ली), सुशील रावत, संजीव सिंह, दीपक (दिल्ली),
महिला आरोपी:
सिमरन, अंजलि, पवित्रा, सरिता लामा, सानिया, प्रीति, मायरा, सबीना, श्वेता, मनीषा कौशिक
धारा लगी, होटल सील… मालिक फरार!
पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ जुआ अधिनियम और आबकारी अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। होटल को सील कर दिया गया है, जबकि होटल मालिक फरार है—जिसकी तलाश जारी है।
ऋषिकेश में गंगा किनारे जहां लोग शांति खोजने आते हैं, वहीं कुछ लोग “ताश और शराब” में किस्मत तलाश रहे थे।
सवाल ये है—क्या ये सिर्फ एक होटल का खेल था या पूरे शहर में ऐसे कई “छुपे कसीनो” चल रहे हैं?
कार्रवाई हुई, लोग पकड़े गए, पुलिसकर्मी सस्पेंड हुए… लेकिन असली सवाल अभी भी वहीं है—
क्या ये सर्जिकल स्ट्राइक आखिरी है या बस एक “दिखावटी छापा”?




