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‘बदमाशी की तो खबर लेंगे’ वाले अजय पाल शर्मा पर खुद बदमाशी का आरोप, बंगाल में उल्टा FIR
बंगाल में ‘सिंघम’ का सिन्हा-रोदन: IPS अजय पाल शर्मा पर FIR, हीरोइज्म का ढोंग और वोटर धमकी का नया अध्याय
बंगाल:फाल्टा (दक्षिण 24 परगना) में एक महिला ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है कि 27 अप्रैल की रात IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा और केंद्रीय बलों के जवान घर में जबरन घुसे, महिलाओं के साथ मारपीट और छेड़छाड़ की, तथा भाजपा के पक्ष में वोट डालने के लिए दबाव बनाया। महिला का आरोप है कि अगर आदेश नहीं माना तो 4 मई के बाद दोबारा आकर नुकसान पहुंचाया जाएगा। शिकायत में अश्लील व्यवहार और धमकी के गंभीर आरोप लगे हैं, जिसके बाद अजय पाल शर्मा और संबंधित बलों के खिलाफ FIR दर्ज हो गई है।
यह वही अजय पाल शर्मा हैं, जिन्हें उत्तर प्रदेश में ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ और ‘सिंघम’ की उपाधि से नवाजा जाता है। यूपी में जौनपुर जैसे जिलों में सैकड़ों एनकाउंटर का क्रेडिट लेने वाले इस अधिकारी को चुनाव आयोग ने बंगाल के संवेदनशील क्षेत्र में पुलिस ऑब्जर्वर बनाकर भेजा। यहां पहुंचते ही उन्होंने टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान (अभिषेक बनर्जी के करीबी) के घर पहुंचकर वायरल वीडियो में सख्त चेतावनी दी — “बदमाशी की तो कायदे से खबर लेंगे, बाद में रोना-धोना मत”। TMC ने इसे ‘धमकी’ और ‘बीजेपी एजेंट’ की करतूत बताया, जबकि शर्मा समर्थक इसे ‘फ्री एंड फेयर वोटिंग’ की रक्षा बता रहे हैं। अब उल्टा, उसी क्षेत्र में रात के अंधेरे में घर घुसकर महिलाओं पर अत्याचार का आरोप उन पर ही लग गया है।
पुराने कारनामों का ट्रेलर
अजय पाल शर्मा का रिकॉर्ड विवादों से भरा पड़ा है। 2020 में रामपुर SP रहते हुए कैश-फॉर-पोस्टिंग घोटाले में उनका नाम आया था, जिसमें SIT जांच हुई और विजिलेंस की सिफारिश भी हुई। एक महिला दीप्ति शर्मा ने उन पर शादी का झांसा देकर धोखा देने, दूसरी महिलाओं से संबंध छिपाने और फिर फंसाने का आरोप लगाकर लखनऊ में FIR दर्ज कराई थी। प्रमोशन अटक गए थे, बाद में क्लीन चिट मिली। लेकिन पैटर्न साफ है — जहां जाते हैं, विवाद पीछा नहीं छोड़ता। अब बंगाल में ‘सिंघम’ बनकर घूम रहे हैं, लेकिन ‘पुष्पा’ वाली TMC का जवाब भी कम नहीं: “अगर वो सिंघम हैं, तो हम पुष्पा हैं।”
हीरोइज्म का दिखावा: रील्स vs रियलिटी
अजय पाल शर्मा खुद को तगड़े पुलिसिया का इमेज प्रोजेक्ट करने में माहिर हैं। वायरल वीडियो में कड़क अंदाज, सख्त भाषा, घर-घर पहुंचकर चेतावनी — सब कुछ सिनेमा का सीन लगता है। लेकिन जब उसी इलाके की एक महिला कहती है कि रात में बिना वारंट घर घुसकर महिलाओं को धमकाया और वोट का दबाव बनाया गया, तो हीरोइज्म का पर्दा फट जाता है। क्या ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ का मॉडल अब चुनाव ड्यूटी में भी लागू हो रहा है? क्या वोटरों को ‘सुधारने’ के लिए रात के अंधेरे में छापे मारना और महिलाओं को निशाना बनाना ‘कायदे से खबर लेना’ है?
तंज यह है कि जो अफसर वोटर धमकी रोकने का दावा कर रहे थे, उसी पर अब वोटर (महिला) धमकी और अत्याचार का आरोप लगा रही है। ‘सिंघम’ की तस्वीर में अब ‘पीड़ित महिलाओं’ की चीखें घुल गई हैं। TMC इसे राजनीतिक साजिश बता रही है, लेकिन सवाल खुद शर्मा पर है — क्या हर जगह ‘कायदे से इलाज’ करने का स्टाइल महिलाओं और आम लोगों पर ही आजमाया जाता है?
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ रहे हैं। एक तरफ जहांगीर खान पर वोटर इंटिमिडेशन की शिकायतें, दूसरी तरफ ऑब्जर्वर पर ही FIR। बंगाल की सियासत में ‘दीदी’ वाली संस्कृति और ‘यूपी मॉडल’ का टकराव जारी है। लेकिन इस पूरे ड्रामे में सबसे बड़ा नुकसान लोकतंत्र और महिलाओं की सुरक्षा का हो रहा है।
अभी जांच चल रही है। अगर आरोप साबित हुए तो ‘सिंघम’ की हीरो वाली इमेज पर फिर से सवालिया निशान लगेगा। फिलहाल, फाल्टा की उस महिला की शिकायत याद दिलाती है — असली हीरो वो होता है जो कानून का पालन करे, न कि जो खुद कानून से ऊपर होने का नाटक करे। बाकी, रील्स बनती रहेंगी, विवाद भी। बंगाल चुनाव का यह अध्याय ‘सिंघम vs पुष्पा’ से आगे बढ़कर ‘हीरो बनाम FIR’ बन चुका है।




