उत्तराखण्ड
रानीखेत विधानसभा सीट पर भाजपा टिकट को लेकर सियासी हलचल तेज।
उत्तराखंड:रानीखेत BJP में टिकट को लेकर अभी से घमासान! धन सिंह रावत ने ठोकी दावेदारी, प्रमोद नैनवाल पर साधा निशाना
बोले- रिपोर्ट कार्ड खराब है तो दोबारा टिकट क्यों? पहाड़ में धनबल के सहारे राजनीति में आने वालों पर भी उठाए सवाल
रानीखेत। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी तैयारियां भले ही अभी शुरुआती दौर में हों, लेकिन भाजपा के भीतर टिकट को लेकर चर्चाएं तेज होने लगी हैं। खासकर पहाड़ की विधानसभा सीटों पर जमीनी कार्यकर्ताओं को मौका देने और नए चेहरों को आगे बढ़ाने की मांग के बीच रानीखेत विधानसभा सीट पर पूर्व ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य और छात्र संघ अध्यक्ष रहे धन सिंह रावत की दावेदारी ने सियासी हलचल बढ़ा दी है।
धन सिंह रावत आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा से टिकट के दावेदार हैं। उनकी दावेदारी को रानीखेत के मौजूदा भाजपा विधायक प्रमोद नैनवाल के लिए संभावित चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है।
‘रानीखेत में सड़क, शिक्षा और व्यापार की हालत खराब’
ATOM BOMB न्यूज़ को दिए विशेष बयान में धन सिंह रावत ने रानीखेत के विकास को लेकर मौजूदा हालात पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में सड़क, शिक्षा और व्यापार से जुड़े मुद्दे गंभीर हैं और रानीखेत जिस तरह का विकास चाहता है, उस दिशा में अपेक्षित काम नहीं हुआ है।
धन सिंह रावत ने पूर्व विधायक एवं भाजपा नेता अजय भट्ट के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उनके विधायक रहते रानीखेत में विकास के कई कार्य हुए, लेकिन इसके बाद क्षेत्र की स्थिति बेहद खराब हुई है।
धन सिंह रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश में विकास के कई कार्य हुए हैं, लेकिन विधानसभा स्तर पर विधायक की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है।
उन्होंने कहा कि जो विधायक अपने क्षेत्र में जनहित के विकास कार्यों को प्राथमिकता देने के बजाय अपना खुद का ‘विकास’ करने में लगे रहे, ऐसे लोगों को आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी का टिकट नहीं मिलना चाहिए।
‘नए और जमीनी चेहरों को मिले मौका’
धन सिंह रावत ने भाजपा के टिकट वितरण को लेकर भी अपनी राय स्पष्ट की। उनका कहना है कि पार्टी को ऐसे नेताओं को आगे बढ़ाना चाहिए जो लंबे समय से संगठन और जनता के बीच जमीन पर काम कर रहे हैं।
उन्होंने संकेत दिया कि सिर्फ धनबल या ठेकेदार पृष्ठभूमि के आधार पर पहाड़ की राजनीति में आने वाले चेहरों के बजाय पार्टी को जमीनी कार्यकर्ताओं पर भरोसा करना चाहिए।
उनके मुताबिक, जिन मौजूदा विधायकों का प्रदर्शन जनता की कसौटी पर बेहतर नहीं है, उन्हें दोबारा टिकट देने के बजाय नए चेहरों को अवसर दिया जाना चाहिए।
रानीखेत में बदलेंगे सियासी समीकरण?
धन सिंह रावत की राजनीतिक पृष्ठभूमि को देखते हुए उनकी दावेदारी को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। वह ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य और छात्र संघ अध्यक्ष जैसे पदों पर रह चुके हैं और क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ का दावा करते हैं।
अब देखना दिलचस्प होगा कि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा रानीखेत से मौजूदा विधायक प्रमोद नैनवाल पर दोबारा भरोसा करती है या पार्टी किसी नए चेहरे को मैदान में उतारने का फैसला करती है।
फिलहाल धन सिंह रावत की दावेदारी ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि रानीखेत में भाजपा के टिकट की लड़ाई चुनावी घोषणा से काफी पहले ही दिलचस्प होती जा रही है।




