उत्तराखण्ड
बेटे को अध्यक्ष बनाने के लिए मां बनीं छात्रा, DSB कैंपस में भानु प्रताप की जीत
बेटे को चुनाव जिताने मां खुद बनीं छात्रा! DSB कैंपस में भानु प्रताप की जीत के पीछे मां की ‘चुनावी पारी’ की चर्चा
नैनीताल। चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार मैदान में उतरा, लेकिन प्रचार की कमान संभालने के लिए उसकी मां ने भी ऐसा कदम उठा लिया जिसकी अब पूरे कैंपस में चर्चा हो रही है। कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर नैनीताल में निर्दलीय भानु प्रताप चौहान ने अध्यक्ष पद का चुनाव जीत लिया है। लेकिन इस जीत की कहानी सिर्फ नतीजे तक सीमित नहीं है। इसके पीछे उनकी मां बीना चौहान की ‘चुनावी पारी’ भी खासा चर्चा बटोर रही है।
बताया जा रहा है कि बेटे को चुनाव जिताने के लिए बीना चौहान ने खुद डीएसबी कैंपस में एमए पॉलिटिकल साइंस में एडमिशन लिया और छात्रा बन गईं। इसके बाद वह कॉलेज परिसर में रहकर बेटे के लिए प्रचार अभियान में जुट गईं।
बेटे की जीत के लिए मां ने संभाली प्रचार की कमान
चुनावी माहौल गरमाया तो बीना चौहान भी बेटे के समर्थन में मैदान में उतर गईं। कैंपस में छात्रों से संपर्क करने से लेकर भानु प्रताप के पक्ष में प्रचार तक, उन्होंने पूरी सक्रियता के साथ चुनावी अभियान में हिस्सा लिया।
मां का इस तरह बेटे के चुनाव प्रचार में उतरना डीएसबी कैंपस में चर्चा का विषय बना रहा। खास बात यह रही कि उन्होंने केवल बाहर से प्रचार करने के बजाय कॉलेज में दाखिला लेकर कैंपस के भीतर से ही बेटे के लिए चुनावी माहौल तैयार किया।
अब नतीजा आया तो चर्चा और तेज
चुनाव परिणाम घोषित हुआ तो भानु प्रताप चौहान ने अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज कर ली। इसके साथ ही उनकी मां बीना चौहान की भूमिका भी चर्चा के केंद्र में आ गई है।
एक तरफ भानु प्रताप ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर छात्रसंघ अध्यक्ष की कुर्सी हासिल की, तो दूसरी तरफ उनकी मां ने बेटे के लिए कैंपस में छात्रा बनकर प्रचार करने का फैसला लेकर इस चुनाव को एक अलग ही कहानी दे दी।
DSB कैंपस का यह चुनाव इसलिए भी याद रखा जाएगा कि यहां एक बेटे ने अध्यक्ष पद का चुनाव जीता, तो उसकी जीत की मुहिम में मां ने बाकायदा छात्रा बनकर कैंपस में मोर्चा संभाल लिया।




