उत्तराखण्ड
रामनगर तहसील में मंडलायुक्त दीपक रावत का निरीक्षण, दाखिल-खारिज और लंबित मामलों पर सख्ती
35वें दिन अधिकांश दाखिल-खारिज पत्रावलियां निरस्त होने पर तहसीलदार से स्पष्टीकरण तलब करने के निर्देश, दो साल से लंबित खुर्रे के मामलों में पटवारियों पर भी कार्रवाई के संकेत
रामनगर। तहसील कार्यालय रामनगर में सोमवार को उस समय प्रशासनिक सख्ती नजर आई, जब कुमाऊं मंडलायुक्त दीपक रावत ने तहसील कार्यालय का निरीक्षण कर राजस्व कार्यों और न्यायालयीन मामलों की स्थिति की बारीकी से समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान लंबित प्रकरणों और दाखिल-खारिज से जुड़े मामलों में देरी पर मंडलायुक्त ने अधिकारियों को समयबद्ध निस्तारण के स्पष्ट निर्देश दिए।
मंडलायुक्त ने तहसील में राजस्व अभिलेखों, न्यायालयीन प्रकरणों और आम जनता से जुड़े विभिन्न मामलों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि न्यायालय में लंबित वादों की नियमित सुनवाई हो और किसी भी मामले को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए। मामलों का नियमानुसार और तय समयसीमा के भीतर निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
35वें दिन दाखिल-खारिज निरस्त होने पर सवाल
निरीक्षण के दौरान दाखिल-खारिज यानी म्यूटेशन से संबंधित पत्रावलियों की स्थिति सामने आने पर मंडलायुक्त ने विशेष नाराजगी जताई। बताया गया कि अधिकांश पत्रावलियां 35वें दिन निरस्त हो रही हैं। इस स्थिति पर उन्होंने तहसीलदार का स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए।
मंडलायुक्त ने कहा कि दाखिल-खारिज के मामलों में नियमानुसार परीक्षण कर समयबद्ध निर्णय लिया जाए। आम लोगों से जुड़े ऐसे मामलों में अनावश्यक देरी किसी भी स्थिति में नहीं होनी चाहिए।
दो साल से लंबित खुर्रे के मामलों पर भी सख्ती
तहसील में दो वर्ष से अधिक समय से लंबित खुर्रे से संबंधित मामलों की भी समीक्षा की गई। इन मामलों में लंबे समय से लंबित रहने पर मंडलायुक्त ने संबंधित पटवारियों से स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए।
उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि लंबे समय से लंबित राजस्व प्रकरणों की नियमित समीक्षा हो और जिन मामलों में कार्रवाई अपेक्षित है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित किया जाए।
धारा-143 के मामलों को 10 दिन में निपटाने के निर्देश
भू-उपयोग परिवर्तन से जुड़े धारा-143 के लंबित आवेदन पत्रों पर भी मंडलायुक्त ने सख्त निर्देश दिए। उन्होंने सभी लंबित प्रकरणों का नियमानुसार 10 दिन के भीतर निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा।
मंडलायुक्त ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनसामान्य से जुड़े राजस्व मामलों में पारदर्शिता, नियमबद्धता और समयबद्धता का विशेष ध्यान रखा जाए।
आम आदमी को तहसील के चक्कर न लगाने पड़ें
मंडलायुक्त ने उप जिलाधिकारी को तहसील स्तर पर लंबित सभी प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लोगों को अपने काम के लिए अनावश्यक रूप से तहसील कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें।
उन्होंने कार्यालयीय व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित रखने और राजस्व मामलों के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर विशेष जोर दिया।
अधिवक्ताओं ने रखी अहलमद की तैनाती की मांग
निरीक्षण के दौरान अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने भी मंडलायुक्त दीपक रावत से मुलाकात की। अधिवक्ताओं ने तहसील में एक अहलमद की तैनाती किए जाने की मांग रखी।
मंडलायुक्त ने कहा कि प्राथमिकता के आधार पर अहलमद की तैनाती की कार्यवाही की जाएगी। साथ ही उन्होंने अधिवक्ताओं से म्यूटेशन यानी दाखिल-खारिज से जुड़े मामलों में आम लोगों के बीच जन-जागरूकता बढ़ाने में सहयोग करने का आह्वान किया।
निरीक्षण के दौरान उप जिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान, तहसीलदार मनीषा मकराना सहित तहसील के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
कुल मिलाकर मंडलायुक्त के निरीक्षण में रामनगर तहसील में लंबित राजस्व मामलों की सुस्त रफ्तार और समयबद्ध निस्तारण की जरूरत प्रमुखता से सामने आई। अब स्पष्टीकरण और तय समयसीमा के बाद लंबित मामलों के निस्तारण पर तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर नजर रहेगी।




