क्राइम
दिनदहाड़े गुंडाराज: बेटी का अपहरण, मां की हत्या — मेरठ में कानून को खुली चुनौती
उत्तर प्रदेश के मेरठ से इंसानियत को झकझोर देने वाली वारदात सामने आई है। एक दलित युवती रूबी का दिनदहाड़े अपहरण और उसकी मां सुनीता की नृशंस हत्या ने पूरे इलाके को दहशत में धकेल दिया है। सात घंटे तक ज़िंदगी और मौत से जूझने के बाद सुनीता ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया—और पीछे छोड़ गईं सवालों का एक अंबार।
बताया जा रहा है कि गांव के दबंग पारस राजपूत ने खुलेआम सुनीता के सामने ही उसकी जवान बेटी का अपहरण कर लिया। मां ने जब विरोध किया तो दबंगई की तलवार चली—धारदार हथियार से बेरहमी से हमला कर सुनीता को मौत के मुंह में धकेल दिया गया। गंभीर हालत में उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन दरिंदगी इतनी भयावह थी कि जान नहीं बच सकी।
यह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की नाकामी का कड़वा सच है। दिनदहाड़े अपहरण, खुलेआम हमला और फिर हत्या—क्या अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें न कानून का डर है, न पुलिस का?
घटना के बाद गांव में आक्रोश और भय का माहौल है। सवाल उठ रहे हैं—आख़िर दबंगों को यह छूट किसने दी? पीड़ित परिवार की सुरक्षा और रूबी की बरामदगी कब होगी? पुलिस जांच की बात कर रही है, लेकिन जमीन पर जवाबदेही और त्वरित कार्रवाई की मांग तेज़ होती जा रही है।
यह मामला सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है। यह चेतावनी है—अगर अब भी सख़्त कार्रवाई नहीं हुई, तो अगली खबर किसी और मां की चीख़ बनकर सामने आएगी।




